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शनिवार, 19 नवंबर 2011

dil kaa sambandh daato se

जब  मेने  ये  पढ़ा   तो  बहुत  ही  अजीब  लगा, भला  dil  का  दांतों  से  क्या  लेना  देना  lekin ये सही है  असल में हमारे मसूडो में पायरिया नामक रोग एंट अमीबा जिन्जेवेलिस नाम के एक जीवाणु द्वारा फैलता  है ये जीवाणु मुह के द्वारा हिर्दय में पहुच कर वहा के वाल्व जो रक्त परिवहन में महत्व पूर्ण  भूमिका निभाते है को खराब कर देते हैं.जिस से heart  blochege  या दिल का दौरा  हो सकता है.इस लिए यदि आप को पायरिया है तो दिल के प्रति भी साव धान रहे और.और अपने दांतों की सफाई का भी विशेष ध्यान रखे
इसके अलावा ज्यादा चाय काफी पीने वाले भी सावधान रहे क्योकि चाय में कफीन पाया जाता है जो धमनियों को सिकोड़ता  है और दिल के दौरे की संभावना बढ़ता है 

janie apne aapko

यूं तो इस दुनिया में जितने लोग होते हैं उतने ही तरह के व्यक्तित्व भी होते है.लेकिन किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व को जाने बगैर उसके साथ किस तरह वर्ताव किया जाये ये बहुत ही सोच विचार का विषय है.अगर मोटे तौर पे देखा जाये तो हम व्यक्ति के व्यवहार से काफी कुछ सीख सकते है.इन्ही व्यवहार के आधार पर व्यक्ति कई प्रकार के हो सकते है जेसे...........
१.परफेक्शनिस्ट -ये लोग बहुत जागरूक होते है इनके लिए इनकी योजनाये बहुत मायने रखती है फिर वो चाहे बाज़ार जाना ही क्यों न हो .लेकिन इनकी येही आदत कभी कभी दूसरो के लिए या स्वयं अपने लिए भी तकलीफ दायक  हो जाती हैक्योकी मन मुताबिक़ काम न होने पर ये अपसेट  हो जाते है.
-प्रोवाइडर -ये लोग दूसरो का बहुत ख़याल रखते है.लेकिन बदले में दुसरे से भी यही उम्मीद भी रखते है.अगर इनको बदले में बराबर का न मिले तो ये निराश भी होने लगते हैं
३-रोमांटिक.-ऐसे लोग जिंदगी में खूबसूरती के अहसास को जगाने के लिए प्रयास रत रहते हैं .इनका मूड स्थाई नहीं होता पल पल में बदलता रहता है
-थिंकर-ये ज्यादा सोच विचार वाले व्यक्ति होते है हर बात को अलग तरह से सोचते है इसलिए इनका निभाव मुश्किल होता है
व्यक्ति केसा भी हो प्रेम में हर इंसान को अपने अनुकूल बनाने की ताकत होती है.
इसके अलावा और भी कई तरह के लोग होते हो जेसे---------
आलोचक-ये बिना बात के क्किसी न किसी बात की आलोचना करते रहते है
दिल फेंक -इन के विषय में तो जेसे त्रिया चरित्र नहीं समझ सकते वेसे ही कहना मुश्किल है.
दिवा स्वप्न देखने वाले-इनकी दुनिया एक कल्पना लोक होता है जो यथार्थ  से परे होती है .
उपरोक्त तीन तरह के लोगो को तो सिर्फ एक ही सुधार सकता है वो है भगवान्
आयिए दुआ करे की हम अपने जीवन को एसा बनाए की दूसरो के जीवन में सरसता लाये और अपने जीवन में शान्ति ........आमीन 

शुक्रवार, 18 नवंबर 2011

10 compliments jo har mahila sun na chahti hai..........

महिलाओं के दिल को जीतना या उन्हें इम्प्रेस करना बहुत मुश्किल है लेकिन कई ऐसी बाते है जो अगर प्रशंसा या जिन्हें हम कोम्प्लिमेंट्स कहते है   हर महिला शायद सुन ना    चाहती होगी आये देखे वो कौन कौन सी है.१.तुम intelligent हो......हर महिला अपने को beauty  विद  ब्रेन कहलाना पसंद करती है
   २तुम्हारि मुस्कराहट बहुत प्यारी है
   ३तुम बहुत खूबसूरत हो
   ४तुम्हारि पर्सोनालिटी बहुत अच्छी है
   5तुम्हारे हाथ का खाना बहुत बढ़िया बनता है
   6 तुम मेरी आदत खराब कर दोगी इतना प्यार दे कर
   ७तुम बहुत स्मार्ट हो
    ८ तुम केसे इतने कम पेसो में इतनी अच्छी तरह घर चलाती हो
   ९ में तुम्हारे बगैर अधूरा हूँ
   १० जानू तुम्हारा कोई जबाब नहीं
आप चाहे तो इन टिप्स को अजमा सकते हैं..........

e khuda tere karam ki.........

ए खुदा तेरे करम की ,नजर किधर न हुई
कौन एसा है की जिस पर तेरी नजर न हुई
माना किस्मत में अँधेरा है मगर ये तो बता
क्या कोई शाम है जिसकी कोई सहर न हुई
वो भी क्या दिल है जो रोया न दुःख में औरो के
वो भी क्या आँख है जो आंसुओ से तर न हुई
अब मसीहा ही बचाए गे मुझे आ कर के
इस ज़माने की दवा कोई कारगर न हुई
इ खुदा तेरे करम की...............

बुधवार, 16 नवंबर 2011

hai ri bidai

यह बात उस समय की है जब में घिरोर नामक कस्बे में पोस्टेड थी .यह क़स्बा up  के शिकोहाबाद के पास है .जहा से छोटी लाइन की ट्रेन चलती थी
आस पास के गाँव के लिए ये ट्रेन यात्रा का सुखी साधन था तो मेरे लिए वह मनोरंजन का भी साधन थी.क्योकि कभी कभी मुझे आस पास के गाँव में भी जाना पड़ता था तो में उसी पसेंजेर से यात्रा करती थी.घिरोर के पास एक और क़स्बा है कौरारा.जो घिरोर जाते आते समय रास्ते में पड़ता था.एक दिन जब ट्रेन कौरारा स्टेशन पर रुकी तो एक व्यक्ति अपनी दुल्हन को विदा  करा कर ले जा रहा था.(गाँव में लडकिया सावन के महीने  में मायके आ जाती है और माह दो माह रह कर जब कोई लिवाने आता है तो वापस जाती है)तो वही दृश्य था.लड़की लम्बा सा घूघट निकाले हुई थी और रो रही थी.आंसू थे या नहीं मालूम नहीं पर रो बहुत जोर से रही थी(ये भी एक प्रथा है शायद)उसको छोड़ने उस लड़की का भाई भी था और भी लोग होंगे.जेसे ही ट्रेन चलने को हुई लड़की और जोर से रोने लगी .मेरा मन द्रवित हो उठा.ट्रेन खिसकने लगी तो वह अपने भाई से चिपट गयी और बहुत जोर जोर से रोने लगी .दृश्य बड़ा ही भारी था.मेने सोचा की अरे अगर और रहना चाहती है तो रह लेने देते.शायद ससुराल वाले दुखी रखते होंगे.सभी यात्रिओ  की सहानुभूति उस लड़की के साथ और जमाई राजा कसी.इधर लड़की भाई को छोड़ने को तैयार नहीं एक बार लगा की कही भाई ट्रेन के साथ ही न घिसटने लगे सो जबरदस्ती भाई का गला लड़की की बाहों से मुक्त कराया.में बहुत दुखी थी और सोच रही थी की जरूर पूछोगी की बहन तुझे क्या कष्ट है.जेसे ही ट्रेन स्टेशन को पार कर गयी लड़की ने झट से अपना घूघट उठाया और जमाई राजा के कंधे पे हाथ मार कर बोली" काहे कल चो नाही लिवावे आये.ट्रेन के डिब्बे में एक हसी का फब्बारा छूट गया और में तो हतप्रभ हो कर बस इतना ही कह पायी "हाय  रे बिदाई"

रविवार, 6 नवंबर 2011

apne apne daant

में एक परमार्थ हॉस्पिटल में सेवार्थ जाती हूँ.ये हॉस्पिटल मुरेना शहर  के एक प्रतिष्ठित डा.साहब द्वारा संचालित है.वे शहर के प्रतिष्ठित डेंटिस्ट हैं .अतः कई मरीज निशुल्क दांत दिखने भी आते हैं.वही पर मेरा परिचय कई नियमित आने वाले मरीजो से हुआ.उनमे से एक है हीरा लाल जी.
                    हीरा लाल जी वेसे तो गोरे चिट्टे पहलवान टाइप करीब सत्तर साल के बुजुर्ग है.लेकिन अपने दांत दर्द से बहुत परेशान  थे.मेने सहानुभूति वश उनसे पूछा अंकल क्या हुआ?वे बोले बेटा कल जब में उड़द की दाल खा रहा था तभी  मेरे दांत के नीचे कंकड़ आया.मैने अपने आगे के दांत पीसते हुए पत्नी को बुला कर कहा "क्यों दाल ठीक से नहीं बीनी".अब पत्नी तुनक कर बोली" दाल में नही आपके मुह में पत्थर होगा".बेटा सच  में यही बात थी आइना देखा तो जिन दांतों पर जवानी में लडकिया मरा करती थी,जिनके पीसने पे अच्छे अच्छे पहलवान के पाँव उखड जाते थे वो ही उखड़े उखड़े से थे.
            मैने कहा अरे अंकल दांत उखडवा कर दूसरे लगवा लो सरकारी पद है एक अपदस्थ तो दूसरा पदासीन.वे बोले हाँ ठीक है लेकिन बेटा मेरा सात साल का नाती जिसके दांत गिर रहे हैं मुझे अपने बराबर का समझ ता है कहता है-"बाबा आप भी खुड्डा में भी खुड्डा"(जिसके दांत टूट जाते है उन्हें खुड्डा कह कर चिढाया जाता है) वो मेरा शक्ति परिक्षण करता है कहता है बाबा मोमबत्ती फूक कर बुझाओ.बाबा फूफा जी बोलो.
               उनकी दन्त गाथा सुन कर  मुझे हँसी आ गयी में मुह मोड़ कर हँसी की वे ठंडी सांस ले कर बोले "अपने अपने दांत'

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

tumhare bina

यह जो भोर की पहली किरण
ओस से भीगे पत्तो का संबोधन
झील पर तैरती तुम्हारी कुछ यादे
और धुआं धुआं फेली दूर तलक रौशनी
सुर्ख फूलो से लदे गुलमोहोर
सर्द गर्म अहसास से सराबोर फिजाये
तुम्हारे बिना,
केवल प्रतीकों से संवेदन हीन
गुलाबो के  बिखरते मनमोहनी रंग
जेसे रागिनी बनते प्रीत पात्र
किसी के लिए प्रेम का प्रतीक
किसी के लिए प्रभु का अर्पण मात्र
तुम्हारे बिना
मुरझा गया मेरे जज्बातों का खिला गुलाब