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शनिवार, 29 अक्टूबर 2011

mithi jhidki

बिहार  की  राजधानी  पटना 
वहा हो गई एक घटना
एक बुड्डा एक बुढिया
होतो पे लाली आँखों पे चश्मा लगाये
हाथो में हाथ डाले बड़ी शान से एक रेस्टोरेंट में आये
बुड्ढे ने बड़े रोब से वेटर को बुलाया और
एक शानदार सा लंच मंगवाया
पहले बुड्डे ने खाया बुढिया प्यार से देखती रही
फिर बुढ़िया ने खाया बुड्डा प्यार से निहारता रहा
हमने कहा अरे ओ लैला मजनू की भटकती आत्माओ
अगर इतना ही प्रेम है तो अलग अलग क्यों खाते हो 
एक दूजे को प्यार से क्यों निहारे जाते हो
बुड्डा बोला बेटा इरादा तो तुम्हारा नेक ही है
पर मजबूरी है क्योकि दांतों का सेट एक ही है