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शनिवार, 29 अक्टूबर 2011

mithi jhidki

बिहार  की  राजधानी  पटना 
वहा हो गई एक घटना
एक बुड्डा एक बुढिया
होतो पे लाली आँखों पे चश्मा लगाये
हाथो में हाथ डाले बड़ी शान से एक रेस्टोरेंट में आये
बुड्ढे ने बड़े रोब से वेटर को बुलाया और
एक शानदार सा लंच मंगवाया
पहले बुड्डे ने खाया बुढिया प्यार से देखती रही
फिर बुढ़िया ने खाया बुड्डा प्यार से निहारता रहा
हमने कहा अरे ओ लैला मजनू की भटकती आत्माओ
अगर इतना ही प्रेम है तो अलग अलग क्यों खाते हो 
एक दूजे को प्यार से क्यों निहारे जाते हो
बुड्डा बोला बेटा इरादा तो तुम्हारा नेक ही है
पर मजबूरी है क्योकि दांतों का सेट एक ही है 

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

bus yoo hi

बेसाख्ता किसी को चाहते चले  जाने का मोसम हमने जिया है........मुहब्बत के एहसास में  भीगे हैं कई बार..........खामोश से उन लम्हों में कई ख्वाबो को खयालो से निकल कर आँखों में समाते हुए महसूस किया है हमने,जिन्हें अब तक पलकों में सहेज के रक्खा है मेने .......आओ प्यार की उन लम्हों  को दुबारा अपने आँखों में सजाये........आओ प्यार की नयी  कहानिया फिर बनाये.........आओ फिर संग संग दीप जलाये 

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

live with fun: ghoshnae

live with fun: ghoshnae: हो रही हैं घोषणाए बस सुनाने के लिए आ गए सब औपचारिकता निभाने के लिए आर्थिक अपराध पथ पर खोजता है जीविका विवशता है चाहिए पैसे जी जाने के लिए ...

शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

ghoshnae

हो रही हैं घोषणाए बस सुनाने के लिए
आ गए सब  औपचारिकता निभाने के लिए
आर्थिक अपराध पथ पर  खोजता है जीविका
विवशता है चाहिए पैसे जी जाने के लिए
जान देने और लेने को हैं तैयार वो
न जाने कौन सी जेब है खंजर छिपाने के लिए
और कितने संस्कारों का दमन करेगा इंसान यहाँ
है खुला आकाश अपनी पहचान छुपाने के liye

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

vaah vaah sheela

पत्नी गुस्से में आई और आ कर चिल्लाई
अजी सुनते हो देखो ये क्या कह रहा है
पति हैरान ये कौन है जो पत्नी के सामने kuch कह पाने की हिम्मत रख  रहा है
पत्नी फिर से चिल्लाई सब तुम से सीख रहा है तुम जो पूरे दिन आँखे सेकते रहते हो सुपुत्र ये नहीं कहेगा तो और  क्या कहेगा
अब पति मिमयाया अरे बोलने  को तो आपने ही पटेंट करा लिया है में तो मूक बधिरों का समाचार हूँ सर हिला कर वो भी हाँ में सुब बात मान लेता हूँ अगर ये कुछ कह रहा है तो ये तो आपका ही बेटा हुआ
पत्नी चिड कर बोली तुम्हे तो कोई होश नहीं इसे नर्सरी में भेजने के लिए में इसे सिखा रही थी वाट इज योर नेम
तो बोलता है मई नेम इज शीला शीला की जवानी
पति मुस्कराया बेटे को प्यार से गले लगाया मन ही मन सरस्वती  और उसकी नयी सहायिका शीला को प्रणाम किया जिसने मेरे बालक के प्रथम विद्या अर्जन में योगदान दिया.वेसे इस गाने को बच्चो की कविताओ में शामिल कर ही लेना चाहिए और ज से जहाज नहीं जलेबी बाई सिखाना  चाहिए 

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

jai ho sensex devta

मेरे बड़े भाई हैं जो एल आइ सी में उच्च पद पर कार्यरत हैं जाहिर  है की वे बाज़ार की अच्छी जानकारी रखते हैं.अरे में शेयर बाज़ार की बात कर रही हूँ.एक बार मुझे उनके ऑफिस में जाने का मौका मिला उस वक्त वे अपने किसी दोस्त से बात कर रहे थे .मैने उनकी बाते समझने की कोशिश की लेकिन सिवाय कुछ शब्द जेसे निफ्टी सेंसेक्स कल और  गिर सकता है.आज तो सेंसेक्स उड़  गया.बात चीत का ये तरीका मेरे लिए थोडा थोडा नया था.दोस्त के जाने के बाद मैने पूछ लिया  भाई  ये सेंसेक्स कैसे  उड़ता है
.वो बोले अरे उड़ने का मतलब  जैसे  छत उड़ जाती है
.मैने फिर पूछा भाई ये छत कहा पाई जाती है
.वे बोले जहा दलाल स्ट्रीट होती है.
भाई दलाल की छत उड़ने से आपका दोस्त क्यों दुखी था
क्योकि ये दलाल के भरोसे था.
अब मेरी जिज्ञासा थोड़ी और बड़ी भाई ये दलाल कौन होते  है
ये वो हैं जो तय करते हैं की देश को किधर जाना चाहिए
ये काम   तो नेता करते है यानी वे भी दलाल हैं
भाई बोले कुछ नयी बात पूछो ये तो सुभी जानते है.लेकिन इन दलालों की दिशा और दशा सेंसेक्स से  बदल गयी है
अरे तो इसे सुधारो इतने बवाल की क्या जरूरत है मैने किसी ज्ञानी की तरह  कहा
अरे ये बाज़ार में भूचाल का मामला है बेटा जिस नेसब  तहस नहस कर दिया
तो भाई लोगो को पी  चिदंबरम से कह कर नया बाज़ार बनवा लेना चाहिए
अरे वे तो तरलता से निपट रहे है
अरे अब ये तरलता सरलता की चचेरी बहन है क्या?
तरलता मतलूब अर्थव्यवस्था.देखो बाज़ार में खुले पेसे नहीं होगे तो बाज़ार केसे चलेगा
तो सरकार नए खुले पेसे और छपवा कर बाज़ार में क्यों नहीं देती फिर तो तरलता ही तरलता 
अरे तुम मुद्रा और अर्थ व्यवस्था में अंतर नहीं समझती सेंसेक्स संभलेगा तो तरलता सुधरेगी
और फिर वो आंधी?
मेरी समझ में अब भी नहीं आया की लोग एक पल में राजा  भोज और दुसरे पल ही गंगू तेली केसे बन जाते हैं
भाई बोले बस इतना समझो की देश की अर्थ व्यवस्था ये दलाल  ही सुधारेगे
भाई तो फिर इन्हें दलाल नहीं दलाल देवता कहना चाहिए.
इन दलालों का आम जीवन की शांति से क्या ताल्लुक है भाई का दोस्त केसे प्रसन्न होगा किस देवता को पूजना चाहिए ये तो दलाल देवता ही जाने.वो दिन दूर नहीं जब ॐ दल्लाल देवता ॐ सेंसेक्स शांति शांति के मंत्र हमारी पूजा में जगह ले लेगे  




सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

fun shayri

"जिन" में बसे जानकी '"रम" में बसे राम
व्हिस्की में बसे विष्णु,और शैम्पेन में बसे श्याम
किस किस का त्याग करू मैं
har बोतल में भगवान् 

किस किस को याद kijiye किस किस को रोइए
आराम बड़ी चीज है मुह ढक कर सोइए