मंगलवार, 18 अक्तूबर 2011

jai ho sensex devta

मेरे बड़े भाई हैं जो एल आइ सी में उच्च पद पर कार्यरत हैं जाहिर  है की वे बाज़ार की अच्छी जानकारी रखते हैं.अरे में शेयर बाज़ार की बात कर रही हूँ.एक बार मुझे उनके ऑफिस में जाने का मौका मिला उस वक्त वे अपने किसी दोस्त से बात कर रहे थे .मैने उनकी बाते समझने की कोशिश की लेकिन सिवाय कुछ शब्द जेसे निफ्टी सेंसेक्स कल और  गिर सकता है.आज तो सेंसेक्स उड़  गया.बात चीत का ये तरीका मेरे लिए थोडा थोडा नया था.दोस्त के जाने के बाद मैने पूछ लिया  भाई  ये सेंसेक्स कैसे  उड़ता है
.वो बोले अरे उड़ने का मतलब  जैसे  छत उड़ जाती है
.मैने फिर पूछा भाई ये छत कहा पाई जाती है
.वे बोले जहा दलाल स्ट्रीट होती है.
भाई दलाल की छत उड़ने से आपका दोस्त क्यों दुखी था
क्योकि ये दलाल के भरोसे था.
अब मेरी जिज्ञासा थोड़ी और बड़ी भाई ये दलाल कौन होते  है
ये वो हैं जो तय करते हैं की देश को किधर जाना चाहिए
ये काम   तो नेता करते है यानी वे भी दलाल हैं
भाई बोले कुछ नयी बात पूछो ये तो सुभी जानते है.लेकिन इन दलालों की दिशा और दशा सेंसेक्स से  बदल गयी है
अरे तो इसे सुधारो इतने बवाल की क्या जरूरत है मैने किसी ज्ञानी की तरह  कहा
अरे ये बाज़ार में भूचाल का मामला है बेटा जिस नेसब  तहस नहस कर दिया
तो भाई लोगो को पी  चिदंबरम से कह कर नया बाज़ार बनवा लेना चाहिए
अरे वे तो तरलता से निपट रहे है
अरे अब ये तरलता सरलता की चचेरी बहन है क्या?
तरलता मतलूब अर्थव्यवस्था.देखो बाज़ार में खुले पेसे नहीं होगे तो बाज़ार केसे चलेगा
तो सरकार नए खुले पेसे और छपवा कर बाज़ार में क्यों नहीं देती फिर तो तरलता ही तरलता 
अरे तुम मुद्रा और अर्थ व्यवस्था में अंतर नहीं समझती सेंसेक्स संभलेगा तो तरलता सुधरेगी
और फिर वो आंधी?
मेरी समझ में अब भी नहीं आया की लोग एक पल में राजा  भोज और दुसरे पल ही गंगू तेली केसे बन जाते हैं
भाई बोले बस इतना समझो की देश की अर्थ व्यवस्था ये दलाल  ही सुधारेगे
भाई तो फिर इन्हें दलाल नहीं दलाल देवता कहना चाहिए.
इन दलालों का आम जीवन की शांति से क्या ताल्लुक है भाई का दोस्त केसे प्रसन्न होगा किस देवता को पूजना चाहिए ये तो दलाल देवता ही जाने.वो दिन दूर नहीं जब ॐ दल्लाल देवता ॐ सेंसेक्स शांति शांति के मंत्र हमारी पूजा में जगह ले लेगे  




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