गुरुवार, 20 अक्तूबर 2011

vaah vaah sheela

पत्नी गुस्से में आई और आ कर चिल्लाई
अजी सुनते हो देखो ये क्या कह रहा है
पति हैरान ये कौन है जो पत्नी के सामने kuch कह पाने की हिम्मत रख  रहा है
पत्नी फिर से चिल्लाई सब तुम से सीख रहा है तुम जो पूरे दिन आँखे सेकते रहते हो सुपुत्र ये नहीं कहेगा तो और  क्या कहेगा
अब पति मिमयाया अरे बोलने  को तो आपने ही पटेंट करा लिया है में तो मूक बधिरों का समाचार हूँ सर हिला कर वो भी हाँ में सुब बात मान लेता हूँ अगर ये कुछ कह रहा है तो ये तो आपका ही बेटा हुआ
पत्नी चिड कर बोली तुम्हे तो कोई होश नहीं इसे नर्सरी में भेजने के लिए में इसे सिखा रही थी वाट इज योर नेम
तो बोलता है मई नेम इज शीला शीला की जवानी
पति मुस्कराया बेटे को प्यार से गले लगाया मन ही मन सरस्वती  और उसकी नयी सहायिका शीला को प्रणाम किया जिसने मेरे बालक के प्रथम विद्या अर्जन में योगदान दिया.वेसे इस गाने को बच्चो की कविताओ में शामिल कर ही लेना चाहिए और ज से जहाज नहीं जलेबी बाई सिखाना  चाहिए 

2 टिप्‍पणियां:

  1. हिन्‍दी की उदीयमान व्‍यंग्‍यकार को प्रणाम...
    बहुत अच्‍छा लिख रही हैं आप...
    ब्‍लॉग का कलेवर कुछ बदल लें तो और भी बेहतर रहेगा...साथ ही सुझाव है कि पोस्‍ट का टाइटल भी हिन्‍दी में दें जब पूरा ब्‍लॉग हिन्‍दी में ही है...

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