सोमवार, 21 नवंबर 2011

aasha vaadi jeene ki kala

मेने एक गीत सुना था की 'गम की अँधेरी रात में ,दिल को न बेकरार कर ,सुबह जरूर आएगी,सुबह का  इन्तजार  कर
लाख  अँधेरा हो ,पर यदि ये आस हो की हर रात की सुबह होती है और हमारे  गम से  भरी रात भी  खुशनुमा        सुबह में बदले  गी  तो  जीवन  बहुत  आसान  लगने लगेगा .इसके लिए बस आशा वादी   बनिए .जीवन में सकारात्मक सोच रखना ही जिन्दा दिली कहलाती  है.मुह लटकाने वाले को कोई पसंद नहीं करता.हमे अकेले ही रोना  होता    है.शोध  बताते  हैं की जब  हम सोचते  है तो उस  वक्त  हम एक शक्तिशाली  चुम्बक बन  जाते  है.और अपनी  सोच के  मुताबिक  ही आस पास  की ऊर्जा को अपनी तरफ खींच  ने  लगते  हैं.अगर  सोच नकारात्मक  है तो नकारात्मक ऊर्जा हमे घेर  लेती   है.और यदि हम सकारात्मक सोच रहे हैं तो सकारात्मक ऊर्जा अपना आभा मंडल हमारे चारो तरफ बिखेरने लगती है और वो व्यक्ति ज्यादा  खुश और ऊर्जावान दिखने लगता है.खुश रहने के लिए सुबसे पहले अपने लिए अच्छा सोचना शुरू कीजिये.में फिट हूँ.में सारे दिन कुछ न कुछ करता रहूगा.में खुश रहूगा में आज किसी पर नाराज नहीं हो ऊँगा ये सकारात्मक सोच धीरे धीरे आपकी   आदत बन जाएगी  और मेरा   यकीं मानिये आप अपने आपको ज्यादा स्वस्थ खुश और ऊर्जा वांन  महसूस करेगे.आशा वादियो पर कई शोध हुए है वे बताते है की आशा वादी व्यक्ति में सीखने की छमता ज्यादा होती है.उनमे रोग प्रतिरोधक ता भी ज्यादा होती है.हमारी सोच हमारे जीवन पर असर डालती है.हमारी अनुभूतिया ब्रहमांड में तरंग भेजती है.और तरंगे प्राप्त करती हैं.यदि आप नेगेटिव  सोचेगे तो जिन्दगी में नकारात्मकता निराशा बढ़ेगी .इसलिए आशा वादी बनिए.थिंक पोजीटिव  बी   पोज टिव .

3 टिप्‍पणियां:

  1. लीजिये बन गए आशावादी शायद देश भ्रष्टाचार मुक्त हो :)
    कृपया वर्ड वैरिफिकेसन हटा दीजिये

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  2. exactly think possitive be possitive ....समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  3. पूनम जी जैसा आपने मेरी सहायता माँगी थी वह इस प्रकार हैं ;
    डैशबोर्ड में जाकर सेटिंग में जाएँ फिर बेसिक सेटिंग में जाकर वर्ड वेरिफिक्सन को नो कर दीजिये और फिर सेव करलें बस यही करना है

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