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रविवार, 20 नवंबर 2011

safed jhoot yaani positive soch.........

हर रिश्ता विशवास पर टिका होता है.तो फिर झूट की गुंजाइश ही कहाँ है.लेकिन कई बार हम सिर्फ अपने से जुड़े व्यक्ति को खुश करने के लिए भी बिना बात झूट भी बोलते है जिसे सफ़ेद झूट कहते है.इस से किसी का कोई नुक्सान नहीं होता बस इसके पीछे किसी को ठेस न पहुच जाये ये positive  सोच होती है आये देखे हम कौन कौन से सफ़ेद झूट अक्सर बोलते हैं-----
१-नहीं इस ड्रेस में तुम ज्यादा मोटी नहीं लग  रही
२- ट्राफ्फिक जाम में फस गयी थी इसलिए लेट हो गयी
३-अरे ये मेने नहीं किया
४सिर्फ़ ५ min  में खाना लगाती हूँ
५मेरि उम्र.........?२९ अब ३० कहना ज्यादा ठीक नहीं लगरहा
६-फ़ोन आये तो कह देना में घर पर नहीं हूँ
क्योकि कहा भी है की सच  कडवा होता है तो सच  बोल कर यदि किसी को दुःख पहुचता है तो एसा सच  नहीं बोलने में ही भलाई है.अक्सर लोग किसी अनचाही स्थिति से बचने के लिए इस तरह के सफ़ेद झूट का सहारा लेते हैं.
शोध बताते है की लोग अपने आप से भी झूट बोलते हैं जेसे हमने किस तरह और कितना खाया,योग किया या नहीं लेकिन सफ़ेद झूट बोलने वालो का एक positive  पहलू भी है लोग उन्हें ज्यादा पसंद करते है.और इसे लोग ज्यादा खुश भी रहते हैं.लेकिन कभी कभी ये झूट भी भारी पड़ सकता है और आपसी  संबंधो में दरार भी डाल सकता है इसलिए आपको कितना और कब झूट बोलना है ये आपको खुद तै करना है.जहाँ तक संभव हो जीवन साथी से झूट न बोले.और यदि झूट  पकडे जाने  की थोड़ी सी भी सम्भावना हो तो झूट कदापि न बोले 

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